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चौपाल विधानसभा क्षेत्र में भाजपा — कांग्रेस की करारी टक्कर के आसार…

 

दोनों तरफ छह – छह टिकट के चाहवानों की कतार से घात और भीतरघात का खतरा

आवाज जनादेश चुनाव डेस्क शिमला

प्रदेश विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आते ही इन दिनों राजनीतिक गतिविधियां रफ्तार पकड़ गई है। राजनीति विधानसभा क्षेत्रों में केंद्रित होने लगी है । राजनीतिक दलों के संगठन और उनकी हाई कमान विधानसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों को उतारने के लिए पार्टी टिकट पर चिंतन , मंथन कार्यकर्ताओं की राय और पार्टी की टिकट कतार में खड़े लोगों वजन तोल करने लगी हुई है ।

राजनीति के इस दौर में शिमला जिला के विधान सभा क्षेत्र चौपाल में जिन राजनीतिक समीकरणों की आहट दस्तख देने लगी है और यही तस्वीर चुनाव अखाड़े में देखने को मिली तो निश्चित है चौपाल में मुकाबला बड़ा दिलचस्प होगा ।

शशिदत शर्मा 

अमित चौहान 

I.N मेहता

भाजपा की टिकट दावेदार

डा सुभाष मेंगलेट

रजनीश किमटा

बलबीर वर्मा वर्तमान विधायक

इस विधान सभा क्षेत्र में जो तस्वीर सामने आ रही है आज तक की स्थिति में उसमे प्रमुख मुकाबला भाजपा और कांग्रेस में होगा ।इस सीट का राजनीतिक इतिहास देखें तो भाजपा के आज तक इस सीट से दो ही विधायक रहे है । राधा रमण शास्त्री और वर्तमान में बलवीर सिंह वर्मा के अतिरिक्त इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा है ।

इस बार जो सियासी गलियारों से खबर छनकर आ रही है उसमे भाजपा अपने वर्तमान विधायक बलवीर सिंह वर्मा पर दाव लगा रही है जबकि कांग्रेस प्रदेश कांग्रेस के प्रशासनिक संगठन सचिव रजनीश किमटा को मैदान में उतार सकती है । इसके अतिरिक्त कई अन्य दल भी चौपाल से अपना उम्मीदवार मैदान में उतरने को तैयार है।

भाजपा और कांग्रेस दोनों में अहम मुकाबला होगा पर दोनो की पनघट की डगर आसान नहीं ।

कांग्रेस के इस सीट ने टिकट के चाहवानों में छह नाम है इसमें आईएन मेहता , रिपना कलसाईक , सबला राम चौहान , पूर्व कांग्रेस विधायक सुभाष मंगलेट ,रजनीश किमटा, और सुरेंद्र शर्मा के नाम प्रमुख है। पार्टी में रजनीश किमटा के नाम पर मोहर लगने की चर्चाएं चल रही है ।

भाजपा के भी इस सीट से टिकट के छह ही चाहवान है इनमे अमित चौहान , शशि दत्त शर्मा , सीमा मेहता , पूर्व विधायक व मंत्री राधा रमण शास्त्री , वर्तमान विधायक बलवीर सिंह वर्मा , नरेंद्र चौहान के नाम शामिल है। भाजपा के गलियारों की चर्चाओं में वर्तमान विधायक बलवीर सिंह वर्मा का टिकट तय माना जा रहा है।

दोनो पार्टियों की टिकट वर्तमान में बन रहे समीकरण और चर्चाओं के मुताबिक रही तो दोनों दलों के पांच -पांच नाकाम रहने वाले टिकट के चाहवान सीट के परिणाम पर असर डाल सकते है। टिकट न मिलने पर एक कांग्रेस और एक भाजपा के टिकट चाहवान नेता के तो अपनी पार्टी को बाय बाय करने की भी चर्चाएं खूब चल रही है।

इस सीट पर दोनों दलों की प्रमुख चुनौती है कि वह टिकट चहवानो और उनके चहवानों को भी पार्टी की मुख्य धारा में रखे ।इतना ही नहीं इस सीटों पर दोनों पार्टियों को भीतरघात की चुनौती भी रहेगी । जो पार्टी इस पड़ाव को अधिक सक्षमता से पार कर जाएगी उसका यह जीत के। करीब जाने को बोनस प्वाइंट होगा ।

इसके अतिरिक्त कांग्रेस को उनके पिछले विधायकों , मंत्रियों और सरकारों के समय की विकास में रही कमियों , वर्तमान में प्रदेश व केंद्र में भाजपा की सरकारों की उनके उम्मीदवार को मिलने वाली इमदाद नुकसान कर सकती है ।

इस सीट पर कांग्रेस को लाभ देने वाले मुद्दों में उनके पिछले विधायकों और सरकारों के काम , वर्तमान विधायक व सरकार के समय सड़कों और अन्य योजनाओं में कई जगह भ्रष्टाचार के आरोपों की चर्चाएं, कई सड़कों पर ठेकेदारों के 15 फीसदी काम करने पर करीब 62 फीसदी सड़क की कुल लागत राशि की अदायगी करके अपने खासम खास को लाभ देने की चर्चाएं और मुख्यमंत्री के हाल ही में प्रदेश गठन के 75 साल कार्यक्रम पर नेरवा में आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्र के विकास के लिए कोई घोषणाएं न करना , इस मौके पर कुछ पानी की योजनाओं के शिलान्यास हुए परन्तु पुरानी योजनाएं जिस का लोगों को अभी लाभ ही और करीब 90 प्रतिशत खराब है या अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। चुनावी समय में ऐसी कई बाते भाजपा को नुकसान का कारण बन सकती है ।

भाजपा के उम्मीदवार की चौपाल से यह मजबूती हो सकती है उनमें वर्तमान विधायक के किए कार्य , राज्य व केंद्र में अपनी सरकार होना , पार्टी का मजबूत संगठन और प्रमुख विरोधी कांग्रेस में संगठन में मतभेद । भाजपा को लाभ पहुंचा सकते है ।

इसके साथ ही जिन अन्य पार्टियों के उम्मीदवार चौपाल से मैदान में होंगे उनसे किसको कितना डेंट लगेगा परिणाम के लिए यह भी एक कारण रहेगा ।

चुनाव आते आते इस बार चुनाव के जो समीकरण बनने नजर आ रहे है उससे साफ है कि यहां मुकाबला दिलचस्प होने वाला है । दोनों ही तरफ से होगी शह और मात के खेल में चाबी आवाम के हाथ रहेगी ।

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